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पारिवारिक विवाद ।।

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पारिवारिक विवाद ।।

FAMILY DISPUTE

NOTE :-

ITS DEPENDENT ON ASTROLOGICAL

FUNDAMENTS WITH NATURAL

ACTIVITIES AND EFFECT

यह ज्योतिष पर निर्भर है

प्राकृतिक के साथ बुनियादी बातें

गतिविधियाँ और प्रभाव ।।

आधुनिक काल में बढ़ते हुए पारिवारिक विवाद के लक्षण पर ज्योतिषविज्ञ आर के मिश्र जी का अभूतपूर्व ज्योतिषीय व व्यवहारिक विश्लेषण आप सभी के समक्ष प्रस्तुत हैं ।

प्रश्न :- आखिर पारिवारिक विवाद क्यों होते हैं ? आखिर पारिवारिक विवाद का करण क्या हैं ।

प्रश्नोत्तरी :- सामान्यतः किसी भी विवाद का एक ही मूल कारण हैं मनो-विकृति जब मन के विकार मस्तिष्क में अपना प्रभाव छोड़ते हैं तो विवाद रूपी तथ्य का होना संभव हैं । संभव हैं की अन्य सभी प्रकार के विवाद पारिवारिक मामलों से संलग्न हो ।।

                                                       उपरोक्त दर्शाये गए सभी विवरण तथ्यात्मक व वैचारिक दृष्टि से सत्य हैं । किन्तु , इसकी पुष्टि हेतु ज्योतिषीय आधार एक महत्वपूर्ण श्रोत्र में से प्रमुख भूमिका निभाती हुई प्रतीत होती हैं । एक बात तो सत्य हैं की हर एक तत्व और तथ्य की अपनी एक आभा होती   हैं । स्वभाव व गुण का अपना निजी प्रभाव होता हैं । ज्योतिषीय तत्व व तथ्य इसी ग्रह रूपी यथार्थ से संबंधित हैं जिसके निजी स्वभाव व गुण का अपना एक प्रभाव हैं । विशेष तौर पर स्थान ( भाव ) रूपी यथार्थ का भी विशेष महत्व ज्योतिष शास्त्र मानता हैं ।

सूत्र १. स्वाभाविक प्रभाव :-

लग्न कुंडली के लग्न जातक के स्वभाव व चरित्र का व्याख्यान करता हैं ! वही पर सप्तम भाव उसके जीवनसाथी के स्वभाव व चरित्र का व्याख्यान करता हैं । ज्योतिषीय सूत्रनुसार यदि देखा और समझा जाएँ लग्न या सप्तम भाव में मौजूद पापी व क्रूर ग्रह स्वाभाविक स्तर पर जातक व जातिका को पापी व क्रूरता का स्वभाव प्रदान करते हैं । कोई भी ग्रह स्वाभाविक स्तर से क्रूर व पापी होते  हैं । यदि लग्न में राहू हो तो सप्तम भाव में केतु हो , केतु जैसे पाप ग्रह की मौजूदगी विवाहिक जीवन में परेशानी का कारक बन जाते हैं । मंगल जैसे स्वभाव से तीक्ष्ण व क्रूर ग्रह विवाहिक जीवन को समस्याग्रस्त करते हैं । यदि सूर्य हो तो अपनी तेज से अहंकारी स्वरूप प्रदान करके उसे प्रभावित करते हैं । शायद इसी कारण मैंने जीतने भी कुम्भ लग्न व राशि के जातक को देखा हैं उनके जीवन साथी का स्वभाव अपने वर्चस्व को कायम करने हेतु ही देखा अस्वास्थयता उनके जीवन में रही किन्तु , फिर भी उसे अहंकारी स्वरूप में मैंने देखा हैं जिद्दीपन का स्वभाव जीवन साथी के स्वभाव में देखने को मिलता हैं । उपरोक्त सूत्र का प्रभाव मैंने कुम्भ राशि के जातक पर भी लागू होते देखा हैं । वही सिंह राशि के जातक का या फिर सिंह लग्न के जातक का स्वभाव खुद में ही जिद और अहंकारी स्वरूप में देखने को मिलता हैं । वास्तव में ये लोग अपना प्रभाव स्थापित करना चाहते हैं इसके अलावा इनका कोई और मकसद नहीं होता ।

वही शनि जैसे मायूस ग्रह विरक्ति का कारक बन जाता हैं मानसिक कलेश का कारक बन जाता हैं रोग का कारक बन जाता हैं । उदासीनता का कारक बन जाता हैं ।

मंगल से प्रभावित उपरोक्त संबंधित गृह क्रोधी स्वभाव को दर्शाते हैं । क्षय कारक मंगल मृत्यु प्रदायक भी होते हैं । जिसे आप सभी व्यक्ति मांगलिक दोष के रूप में जानते हैं । विशेष रूप से मांगलिक दोष से संबंधित मामलों को विशेष रूप से पूर्व के लेख द्वारा विश्लेषित किया जा चुका हैं । जिसका लिंक आप सभी के समक्ष https://bhagalpurastrology.com/?p=1400 रखा गया हैं ।

सूत्र २. स्थान प्रभाव :-

जिस प्रकार हर एक स्थान का अपना एक विशेष महत्व व प्रभाव इस भौतिक जगत में होता हैं ठीक उसी प्रकार हर एक तथ्य का स्थानोचित्त प्रभाव होता हैं । इसी सिद्धांत अनुसार ज्योतिष में भी मानक ग्रह का स्थानोचित्त प्रभाव होता हैं । यदि विषय संबंधित ग्रह सही स्थान में हो तो किसी भी प्रकार की कोई दिक्कतों का सामना व्यक्तिगत स्तर से न करना पड़े ।। यदि लग्न द्वितीय चतुर्थ पंचम व सप्तम भाव के स्वामी अपने उपयुक्त जगह में न रहे तो पारिवारिक विवाद हो सकता हैं । यदि इस स्थान पर अकारक ग्रह जो कुंडली के अनुसार हो या अकारक युति ग्रह से बनता हो तो इससे संबंधित प्रभाव कष्टप्रद होने की संभावना हैं ।

सूत्र ३. व्यक्तिगत बनावट :-

हर के व्यक्ति की प्राकृतिक बनावट होती हैं , जिसका प्रभाव रंग रूप व स्वभाव पर देखने को मिलता हैं । उपरोक्त संबंधित मामलों की जानकारी हमे नक्षत्र ज्योतिष आधारित ज्योतिषीय क्रियाओ द्वारा प्राप्त होता हैं । मूलतः इस पद्धति में चंद्रमा का विशेष प्रभाव होता हैं । जो रूप रंग गंध स्वभाव व क्रिया पर विशेषाधिकार लिए अधिष्ठित हैं । जिसे अष्टकूट के नाम से ज्योतिषविज्ञ जानते व पहचानते हैं । मैंने पूर्व के लेख के माध्यम से अष्टकूट का विश्लेषण कर दिया हैं । जिसके दो भाग में कुंडली मिलान प्रकरण के माध्यम से यथासंभव अल्पज्ञान के माध्यम से विश्लेषित करने की चेष्टा की हैं । जिसका लिंक आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ ।।

  कुंडली मिलान भाग १.   https://bhagalpurastrology.com/?p=1405

  कुंडली मिलान भाग २.   https://bhagalpurastrology.com/?p=1431

उपरोक्त पारिवारिक विवाद से संबंधित मामलों के विषय में जानकारी हेतु आपके लिए ऊपर निर्दिष्ट कड़ी सहायक सिद्ध हो । इस परिकल्पना के साथ अपनी वाणी को विराम ।।

महाकाल गुरु आपके पारिवारिक जीवन में सुख शांति व समृद्धि का वास करें इसी मनोरथ के साथ जय गुरुदेव जय महाकाल ।।

मेरे आराध्य आनंदेश्वर नाथ महादेव की कृपा से आपके सभी मनोरथ सिद्ध व पूर्ण हो ।।

                                                            🙏🙏🙏🙏🙏


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