BHAGALPUR ASTROLOGY & RESEARCH CENTER
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हस्तरेखा विश्लेषण :-
हस्तरेखा विश्लेषण ज्योतिषीय क्रियात्मक पहल का संसाधन हैं जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने भूत वर्तमान व भविष्य के बारें में जानता हैं । वास्तव में हस्त रेखा विश्लेषण भारतीय ज्योतिष के सामुद्रिक शास्त्र का एक हिस्सा हैं । जीव के सम्पूर्ण शरीर को समुद्र नाम से उपाधित ज्योतिष विज्ञान में किया हैं । व्याकरण के दृष्टिकोण से समुद्र का अर्थ जलधि, जलनिधि, नीरनिधि, उदधि, पयोधि, नदीश, तोयनिधि, कम्पती, वारीश, अर्णव आदि प्रमुख हैं ।
किन्तु समुद्र का ज्योतिषीय मापदंड के आधार पर जलीय रहस्य की गहराई भी लिया जाता हैं । एक कहावत के अनुसार ( जब एक व्यक्तियो द्वारा दूसरे व्यक्तियो को कहा जाता हैं की मुझे पता हैं की तुम कितने पानी में हो ! ) अर्थात मुझे तुम्हारे मूल रहस्यों अर्थात क्षमता के बारे में पता हैं । इसी जलीय रहस्य की गहराई का सूक्ष्म विश्लेषण का माध्यम सामुद्रिक शास्त्र बनता हैं । वैसे तो सामुद्रिक शास्त्र के कई विभाग हैं जिसके नाम हस्त रेखा विश्लेषण , चेहरा विश्लेषण , शरीर विश्लेषण व पैर के रेखाओ का विश्लेषण होता हैं । ज्योतिष के हस्त रेखा विश्लेषण , चेहरा विश्लेषण , शरीर विश्लेषण का सामुद्रिक शास्त्र के माध्यम से विशेष पहल ज्योतिषीय कार्यों में किया जाता हैं ।
हस्तरेखा के माध्यम से हाथों की रेखाओ का विशेष पहल ज्योतिषीय कार्य हेतु प्रयोग में होता हैं । ज्योतिषविज्ञ :- आर के मिश्र जी कहते हैं हस्त रेखा हमे प्राकृतिक मापदंड के आधार पर गणितीय ग्राफ के स्वरूप में एक ऐसा वरदान हैं , जिसके माध्यम से व्यक्ति खुद के बारें में जान सकता हैं । व्यक्ति के जीवन के वे रहस्य जिससे व्यक्ति के क्षमता भाग्य व प्राकृतिक बनावट के माध्यम से सूक्ष्म रूप से जानकारी की प्राप्ति होती हैं । जिसके लिए हथेली में छापे हुए प्रकृति द्वारा प्रदत्त रेखाओ का विशेष पहल होता हैं । मूल स्वरूप में हथेली के रेखाओ का अध्ययन ही हस्तरेखा विज्ञान का मूल प्रभाव हैं । जिस प्रकार गणितीय मापदंड में ग्राफ का व लेखा चित्र का विशेष महत्व होता हैं ठीक उसी प्रकार ज्योतिषीय कार्य हेतु सामुद्रिक शास्त्र के द्वारा हस्तरेखा सिद्धांत हमें प्रकृति द्वारा प्रदान की हुई अनमोल ज्योतिषीय रत्नों में से एक हैं । हस्तरेखा में वैसे तो नवग्रहों की भांति प्रमुख तौर पर नव-रेखा होती हैं । जिसके नाम १. आयु रेखा ( पितृ-रेखा ) , २. मस्तिष्क रेखा ( मातृ-रेखा व मानसिक क्षमता रेखा), ३. हृदय रेखा ( भाव रेखा ) , ४. सूर्य रेखा ( आत्म-रेखा ) , ५. शनि रेखा ( भाग्य व कर्म रेखा ) , ६. गुरु रेखा ( ज्ञान रेखा ) , ७. बुद्ध रेखा ( बुद्धि रेखा व विवाह व संतान रेखा ) , ८. राहू व केतु रेखा ( विकार रेखा ) ९. मणिबंध रेखा ( कलाई रेखा ) ये प्रमुख नव रेखा हैं जो समान्यतः सभी जातक व जातिकाओ के हाथों में मौजूद रहता हैं । जिसके आकार प्रकार बनावट स्तिथि का अध्ययन हस्तरेखा विश्लेषण के माध्यम से किया जाता हैं ।
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