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वास्तु विश्लेषण

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वास्तु विश्लेषण

वास्तु विश्लेषण :-

वास्तु का अभिप्राय जैसे की आप सभी जानते हैं की स्थान व गृह निर्माण संबंधित कार्य होता हैं । जिसके संदर्भ में किसी स्थान पर होने वाले निर्माण संबंधित कार्य का रूपरेखा तैयार किया जाता हैं । धर्म शास्त्र के अनुसार वास्तु सिर्फ निर्माण संबंधित कार्य का परिचायक नहीं हैं ! इसका अपना एक शास्त्रवत सिद्धान्त हैं , जिसके माध्यम से किसी भी प्रकार के भौतिक तथ्यों के अनुसार होने वाले निर्माण का धार्मिक स्तर पर विशेष ख्याल रखा जाता हैं ।

ज्योतिषविज्ञ आर के मिश्र जी कहते हैं कि  वास्तु शस्त्र में वास्तु , स्थान, दिशा, देश, व गणितीय विभाग के लेखाचित्र (ग्राफ) का विशेष पहल होता हैं और साथ ही साथ ज्योतिषीय क्रियानुसार कालचक्र के सिद्धांतों का भी अनुपालन किया जाता हैं । मैंने पाया हैं की व्यक्ति के भाग्य अनुसार उसके भौतिक सुख संपत्ति व भौतिक संपदा में विशेष प्रभाव देखने को मिलता हैं जो प्रमुख तौर पर काल चक्र के प्रभाव से ग्रह नक्षत्रों द्वारा प्रदत्त भौतिक संपदा हैं ।
                                                                      सामान्यतः किसी भी प्रकार के निर्माण संबंधित कार्य हेतु स्थान का व दिशा का विशेष ख्याल रखा जाता हैं जिसके अनुरूप लेखा चित्र के माध्यम से निर्माण संबंधित वास्तु का चित्रांकन किया जाता हैं जिसके अनुसार भौतिक तौर पर निर्माण किया जाता हैं । इसमे अंक गणित के गणितीय योग का, स्थानानुसार दिशा का, वास्तु के उपयोग अनुसार स्थान का विशेष ख्याल रखा जाता हैं ।

                                                                  कुछ विशेष नियम यदि कोई व्यक्ति अपने प्रवास हेतु प्रयोजन से अपने गृह का निर्माण करना चाहता हैं तो उसे कुछ विशेष शास्त्रवत सिद्धांतों का अनुपालन करने चाहिए । गृह निर्माण हेतु जमीन श्मशान घाट से ५ किलोमीटर दूर होने चाहिए । प्रवास हेतु गृह का निर्माण किसी मंदिर व मठ के होने का भी विशेष ख्याल रखने चाहिए । गृह में होने वाले कमरे का निर्माण आयताकार होने चाहिए । सम संख्या वाले वर्गाकार व वृतकार कमरे का निर्माण सर्वथा अनुचित होता हैं । अंक शास्त्र अनुसार सम व विषम संख्याओ के योग से बने आयताकार या सम व विषम संख्याओ से निर्मित वर्गाकार चित्र होने चाहिए । निर्माण संबंधित कार्य हेतु उचित दिशा व माप डंडों का विशेष महत्व होता हैं । निर्माण कार्य का प्रारंभ व गृह प्रवेश से संबंधित कार्य हेतु काल चक्र के माध्यम से निश्चित मुहूर्त का भी अनुसरण करने चाहिए । वास्तु शास्त्र गृह के स्वामियों/स्वामिनी के लिए बच्चों के लिए व गृह में आने वाले रिश्तेदारों हेतु निश्चित स्थान का चयन करता हैं जिसके प्रारूप से गृह में  स्तिथि के अनुसार हर एक व्यक्ति के लिए विशेष स्थान निर्धारित करता हैं ।

           जय गुरुदेव जय महाकाल ।।

ASTROLOGER :- MR. R.K.MISHRA     CONTACT NUM :- 06202199681  BHAGALPUR ASTROLOGY & RESEARCH CENTER


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